“तुझे भुला दिया”

कल तक गुंजाइश थी
तुम्हें माफ कर देने की
आज ना रही
कल अगर तुम
अपने सर को झुका लेते
तो आज मेरे दिल में
जगह भी पा लेते
पर अब हमारा रिश्ता
माफी से बहुत दूर जा चुका है
सच कहूं,
तो मेरे दिल में
कोई और घर बना चुका है
बहुत रुलाया, तड़पाया तुमने मुझे
बहुत ढाये सितम
अब मुझ में ताकत ना रही
भुला दिया
मैने तेरा दिया हुआ हर गम।।

Comments

5 responses to ““तुझे भुला दिया””

  1. राकेश पाठक

    संवेदना है

    1. Pragya

      धन्यवाद

  2. अतिसुंदर रचना 

    1. धन्यवाद 

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