बार-बार वही खत खोलकर
पढ़ती हूँ मैं
कि आखिर क्या लिखा
करते थे तुम हमारे लिये
उठाकर तुम्हारा खत
सीने से लगा लेती हूँ
जब भी कभी तुम्हारी याद आती है
यूँ महसूस कर लेती हूँ
जैसे तुम ही आ गये हो
बाँहों में….
तुम्हारा खत
Comments
3 responses to “तुम्हारा खत”
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अतिसुंदर भाव
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सुन्दर
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बीती यादों को लिपिबद्ध करती सुन्दर कविता, बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति
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