6 Comments

  1. “लगाई थी आस अपनों सेपर बेगानों ने दर्द बांटा,”
    जिसने दर्द बांटा वो बेगाना नहीं है कहीं ना कहीं अपना ही है
    बहुत ही प्यार भरी भवाभिव्यक्ति , सुन्दर रचना

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