5 Comments

  1. “उड़ाओ खूब मजे ले लो मगर नजर बना के रखो इंसानी।”
    जो लोग धन का दुरुपयोग करते हैं, अन्न का सम्मान नहीं करते हैं उनके ऊपर कवि सतीश जी ने, कविता के माध्यम से बहुत अच्छा तंज किया है। बहुत ही उच्च स्तरीय व्यंग्यात्मक लेखन

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