तुम गुमान की मूरत…

तुम गुमान की मूरत बने रहो,
और मैं स्वाभिमान की प्रतिमा।

Comments

10 responses to “तुम गुमान की मूरत…”

  1. Geeta kumari

    वाह क्या ख़ूब कहा

    1. धन्यवाद गीता मैम

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    कम शब्द, ज्यादा भाव

  3. Pratima chaudhary

    बहुत बहुत आभार 🙏

  4. Deep

    स्वाभिमान जिसके अंदर होता है,
    वह भविष्य का सिकंदर होता है.

    1. बहुत सुंदर समीक्षा ,धन्यवाद

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