तुम गुमान की मूरत बने रहो,
और मैं स्वाभिमान की प्रतिमा।
तुम गुमान की मूरत…
Comments
10 responses to “तुम गुमान की मूरत…”
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वाह क्या ख़ूब कहा
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धन्यवाद गीता मैम
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खूब
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धन्यवाद सर
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कम शब्द, ज्यादा भाव
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बहुत बहुत आभार 🙏
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स्वाभिमान जिसके अंदर होता है,
वह भविष्य का सिकंदर होता है.-

बहुत सुंदर समीक्षा ,धन्यवाद
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ओह
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धन्यवाद
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