तेरी चाहत

तेरी चाहत में इतना  मैं पराया हो गया खुद  से ,
कि दिल मेरा है फिर भी बात  करता है सदा तेरी..

कभी वो चांदनी मेरी थी, अब पावस की है यह रात,
नहीं दिल में मेरे अब वो, नहीं हाथो में उसका हाथ..

न वो मेरी न मैं उसका तो फिर ये बीच का क्या है,
नहीं देखूंगा अब उसको जो चेहरा चाँद जैसा है…

…atr

Comments

6 responses to “तेरी चाहत”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. राम नरेशपुरवाला

    सुन्दर

  3. Abhishek

    वाह

  4. Satish Pandey

    बहुत खूब

Leave a Reply

New Report

Close