तकलीफ अंदर के शोर से है,
तनहाई तो यूँ ही बदनाम होती है।
गिरता है खारा जल जब भी ऑंख से,
वह सुबह वह शाम, तेरे ही नाम होती है॥
_______✍गीता
तेरे नाम
Comments
5 responses to “तेरे नाम”
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तकलीफ अंदर के शोर से है,
तनहाई तो यूँ ही बदनाम होती है।-
Thanks
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सुंदर रचना गीता जी
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बहुत-बहुत धन्यवाद अनु जी
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति दीदी मां 🙏
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