6 Comments

  1. “ये शहर है अनजानों का मगर,
    अगर कोई अपना मिले तो मानें”

    किसका है ये तुमको इन्तजार मैं हूँ ना !!
    😊😊😊😊😊

  2. आपकी हर एक पंक्ति
    पर मेरे मन में कुछ विचार आ रहे हैं
    भाव की दृष्टि से रचना उत्तम है
    साथ ही तुकांत भी कॉफी सराहनीय है

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