दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते
कभी अश्कों में, कभी लफ़्जों में
निकल आते है वक्त बे वक्त
और छोड़ जाते है निशानी
खारी खारी सी, काली नीली सी
दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते
Comments
4 responses to “दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते”
-

nice
-

thanks
-
-
simply awesome 🙂
-

shukriya anupriya ji
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.