जीना चाहती हूं मैं भी इस दुनिया को देखना चाहती हूं मां तेरे आंचल में सर रखकर सोना चाहती हूं बापू तेरी डाट फ़टकार प्यार पाना चाहती हूं मां मैं तेरा ही हिस्सा हूं तेरा […]

मन के दर्पण पर कुछ प्रतिबिम्ब सा छा गया कुछ कहा नही उसने पर फिर भी कुछ कह गया जैसे भोर में कोई नया पुष्प खिल गया हलचल सी हुई फिर हृदय के कोने में […]

इक जिंदगी थी मेरे पास जो खो गयी है रखता था जिसको बड़े सहेजकर मेरी फटी जेब से इक दिन अचानक सरक गयी बिना आवाज किये आज तलक उसको ढूढ रहा हूं इक जिंदगी थी […]

क्या रे! क्यों शोर मचाता है जीवन क़ी आपाधापी में क्यों आपा खो जाता है बनियान तेरी फ़टी हुई जैबों में एक कोढी तक नहीं ब्लैक मनी ब्लैक मनी चिल्लाता है क्या रे! क्यों शोर […]

**************************************************** खेल खेलते थे तब भी हम आज भी खेलते है बस नियम बदल गये कुछ नीयत भी बदल गयी भागते रहते थे तब भी हम हर तरफ़, चारो तरफ़ आज भी भागते है मगर […]

**************************** उतार दी है जिंदगी सारी कि सारी चंद लफ़्जों में काश कोई समझ ले कभी इसी इंतजार में है इक मुद्दत से कि कभी कोई मेरे लफ़्जों को गढ़ ले कभी| सीधे सपाट शब्दों […]