जीना चाहती हूं मैं भी इस दुनिया को देखना चाहती हूं मां तेरे आंचल में सर रखकर सोना चाहती हूं बापू तेरी डाट फ़टकार प्यार पाना चाहती हूं मां मैं तेरा ही हिस्सा हूं तेरा […]
जीना चाहती हूं मैं भी इस दुनिया को देखना चाहती हूं मां तेरे आंचल में सर रखकर सोना चाहती हूं बापू तेरी डाट फ़टकार प्यार पाना चाहती हूं मां मैं तेरा ही हिस्सा हूं तेरा […]
मन के दर्पण पर कुछ प्रतिबिम्ब सा छा गया कुछ कहा नही उसने पर फिर भी कुछ कह गया जैसे भोर में कोई नया पुष्प खिल गया हलचल सी हुई फिर हृदय के कोने में […]
जिंदगी का खेल अब तक समझ न आया वो दाव खेलते रहे, मैं हारता रहा
इक जिंदगी थी मेरे पास जो खो गयी है रखता था जिसको बड़े सहेजकर मेरी फटी जेब से इक दिन अचानक सरक गयी बिना आवाज किये आज तलक उसको ढूढ रहा हूं इक जिंदगी थी […]
सूखी है जमीन, सूखा आसमान है मगर उम्मीद है कायम, जब तक जान है
पीर दिल की संभाले बैठे थे अरसे से आज पता नहीं कहां से बांध टूट गया|
अगर लम्हों की क़ीमत जान जाएँ हर इक लम्हे में पोशीदा सदी है
Mere jajbaato ko koi nahi samjata yahan Ghayal haalato ki koi kadr nahi kisi ko Ek khyaal tha jo sirf apna tha Ab khyaal bhi log loot ke le gaye
सब शब्दों का खेल है भैया वरना लड़ाई मे तो दोनो ही हारते है
क्या रे! क्यों शोर मचाता है जीवन क़ी आपाधापी में क्यों आपा खो जाता है बनियान तेरी फ़टी हुई जैबों में एक कोढी तक नहीं ब्लैक मनी ब्लैक मनी चिल्लाता है क्या रे! क्यों शोर […]
ये दास्ता कहे नहीं कही जाती कोशिशे क़ी कई दफ़ा मगर भूली भी नहीं जाती गुफ़्तगु ए इश्क कभी लफ़्जों से होती नहीं ये वो बात है जो दिल से है समझी जाती
क्या कहे, क्या लिखे लफ़्ज है ही नही, जो समेट सके जज्बातों को| नहीं कोई जो समझ सके हमारे अजीब से हालातों को |
इक अरसे बाद कुछ लिखने को जी किया थमे थे जो अश्क आंखों में वो आज बह गये न जाने क्या दबा था इस दिल में दरिया बनकर बह गया आज सारा दर्द मेरा
दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते कभी अश्कों में, कभी लफ़्जों में निकल आते है वक्त बे वक्त और छोड़ जाते है निशानी खारी खारी सी, काली नीली सी
पहले घर वापसी, फिर बीफ़ और अब नेशनलिज्म और क्या क्या होगा, जो होना बाकी है
बंजर दिल को क्या खोदते हो बस दर्द मिलेगा, और थोड़ा बहुत मिट्टी जो खारी हो चुकी है अश्कों के भाप हो जाने से
मोहब्बत कहां लफ़्जों में बयां होती है नज़रों का निशाने कहां अल्फ़ाज खिंच पाते है
**************************************************** खेल खेलते थे तब भी हम आज भी खेलते है बस नियम बदल गये कुछ नीयत भी बदल गयी भागते रहते थे तब भी हम हर तरफ़, चारो तरफ़ आज भी भागते है मगर […]
**************************** उतार दी है जिंदगी सारी कि सारी चंद लफ़्जों में काश कोई समझ ले कभी इसी इंतजार में है इक मुद्दत से कि कभी कोई मेरे लफ़्जों को गढ़ ले कभी| सीधे सपाट शब्दों […]
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