दिल का धुंआ भी तो देखा जाये….

 

कोई तो रंग मिलाया जाये

दिल का धुंआ भी तो देखा जाये।

बेबसी ये कि रोक भी न सको

और कोई पास से चला जाये।

जहां सेे भूले थे घर का रस्ता

फिर उसी मोड़ पे जाया जाये।

आईने और कितने बदलोगे

अक्स अपना कभी बदला जाये।

जिदंगी की किताब देखें जरा

कोई तो लफ्ज समझ में आये।

वक्त की तरह मिला हूं उनसे

क्या पता लौटकर न हम आये।

…………सतीश कसेरा

Comments

5 responses to “दिल का धुंआ भी तो देखा जाये….”

  1. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    NICE POEM…
    वक्त की तरह मिला हूं उनसे
    क्या पता लौटकर न हम आये।.. great

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Mohit

  2. Payal sharma Avatar
    Payal sharma

    Going Good!

  3. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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