*दिल की धड़कन*

आंसुओं को अमृत समझ के पी गए हम,
तुम्हारी जुदाई में इस तरह जी गए हम
तुम्हारे आने की आस पलती रही,
तुम्हारी कमी सदा खलती रही
कभी मन का मकरंद उड़ा,
कभी दिल की कली चटकती रही
किया था बहुत इंतजार, तुम आए..
दिल की धड़कन बढ़ गई,
बिजलियां सी गिर गईं
और, फिजां में खुशबुएं बिखरती रहीं..
_____✍️गीता

Comments

4 responses to “*दिल की धड़कन*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

  2. Geeta kumari

    सादर धन्यवाद भाई जी🙏

  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    1. धन्यवाद प्रज्ञा जी

Leave a Reply

New Report

Close