दिल टूटा है मगर
याद धुंधला नहीं अगर
तो क्या करे
लोग छोर ऐ है मगर
हम अकेले है अगर
तो क्या करे
खुदा तेरी नयमत देख
लोग भूले ना भूले
पल बीते ,जिए ना जिए
यह इलतजा शुरूआत तेरी कारिस्तानी से हुआ
तू ही कर खतम
यादें तरपाती हर कदम
खोया मैंने जो कभी मेरा न था
खोया तूने जो तेरा ही था
हारे हम भी नहीं
जिंदगी पटरी पर फिर से आ गई
बस एक ख्लीश सी रह गई
अगर वो होती तो क्या होता
अगर बेरुख रूसवत मे हम राजी होते तो क्या होता
याद तुझे भी आता हूंगा जरूर
एक मुस्कान की तरह
या असरुधारा की तरह
कौन जाने
शायद हर सवाल का जवाब नहीं होता
हर जवाब पर दिल साथ नहीं देता
यही जिंदगी जो जिए जाते है
याद उसकी सीए जाते है
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