ठिठोली करो तुम खूब
लेकिन दिल दुखाओ मत किसी का,
जोर से गाओ मगर
मत चैन लूटो तुम किसी का।
किसी बीमार की जब रात को
आँखें लगी हों मुश्किलों से
जोर से डीजे बजाकर
मत बनो जरिया दुःखों का।
जब कभी कोई व्यथित हो
दुख व पीड़ा से,
सामने उसके
न प्रदर्शन करो अपने सुखों का।
आँख में पर्दा लगाकर
मत चलो ऐसे सड़क पर
भान रख लो तुम
दिखावे के मुखों का।
दिल दुखाओ मत किसी का
Comments
4 responses to “दिल दुखाओ मत किसी का”
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अतिसुंदर भाव
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बहुत खूब, अति उत्तम लिखा है।
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बहुत ही सुन्दर
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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