दिल रोक लेता है

रोज सोचते यही है उनसे
तोड़ देंगे सारे नाते

याद में उनकी नहीं कटेगी
रो-रोकर मेरी रातें

फ़ैसला जब करते हैं
हम दिल रोक लेता है

मेरी याद से बहे समंदर
घुटती हूं अंदर ही अंदर

दर्द है जब हद से बढ़ जाता
दिल रोक लेता है

Comments

One response to “दिल रोक लेता है”

  1. Kanchan Dwivedi

    Very nice pragya

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