12 Comments

  1. बहुत सुंदर भाव और सुन्दर रचना है सुमन जी ।बिल्कुल ये मंच एक परिवार जैसा ही है। जहां अनजाने भी पहचाने से हो जाते हैं।

  2. मैं जानती हूं सुमन जी
    हर कवि के जीवन में एक खालीपन होता है
    उस खालीपन में अनगिनत दर्द होते हैं जो कवि को संवेदनशील बनाते हैं
    लेकिन यह संवेदनशीलता एक आम इंसान को कमजोर बना सकती है पर कवि के लिए यह वरदान सिद्ध होती हैं हम अनजान नहीं अपने ही हैं आपको आपकी कविताओं से जान वा समझ चुके हैं..

      1. मेरे पास शब्द नहीं ।
        पर यह मंच, आप सबो का साथ, अच्छे कर्मों की निशानी है ।

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