दीप जलाकर रख दिये
आप ही अपने द्वार
आ गया मुझको आप ही
अपने ऊपर प्यार
अपने ऊपर प्यार यार
आया जब मुझको
इन नैत्रों में दिख गये
सांवरे साजन मुझको
देखकर साजन हुई
शर्म से पानी-पानी
साठ बरस में याद आई
मुझको मेरी जवानी…
दीप जलाकर रख दिये
Comments
5 responses to “दीप जलाकर रख दिये”
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बहुत खूब
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Tq
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क्या बात है
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आभार दी
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Oh sorry
कृपया नेत्रों’ पढ़े
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