दु:ख

कभी कभी दु:ख को
गले लगा कर भी जीना पड़ता है।
तभी तो सुख से ज्यादा इस जहाँ में
दुःख की महता है।।
जब तक इंसान के जीवन के
धड़कन की डोर चलती है।
तब तक ए अमित रंग बिरंगी
दु:ख हमारे साथ कहाँ छोड़ती है।।

Comments

5 responses to “दु:ख”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

  2. बहुत ही सुंदर रचना

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