दुल्हन की तरह मिल

सहरा में मुझे तू किसी गुलशन की तरह मिल
मैं मर रहा हूँ आ मुझे जीवन की तरह मिल
तुझे देखकर शायद मुझे कुछ साँस आ जाए
बेजान से इस दिल को तू धड़कन की तरह मिल
मैं उम्र भर तुझको ही बस सुलझाने में रहूँ
तू रोज़ मुझे एक नई उलझन की तरह मिल
चल माना हकीक़त में मुझे मिल नहीं सकती
पर ख्वाब में तो तू मुझे दुल्हन की तरह मिल
@@आशुतोष चौधरी @@

Comments

5 responses to “दुल्हन की तरह मिल”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    nice poem bro

  2. Ashutosh Chaudhary Avatar
    Ashutosh Chaudhary

    Thanks

  3. UE Vijay Sharma Avatar
    UE Vijay Sharma

    चल माना हकीक़त में मुझे मिल नहीं सकती
    पर ख्वाब में तो तू मुझे दुल्हन की तरह मिल ………….. nice ..

    1. Ashutosh Chaudhary Avatar
      Ashutosh Chaudhary

      Thanks vinay ji

  4. राम नरेशपुरवाला

    Best

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