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  1. माता पिता की सेवा भाव सबसे बड़ी भावना है ।
    “भूल जाते हैं कि ईश्वर, है स्वयं अपने घरों में” ,जो लोग माता पिता का आदर नहीं करते हैं, उन लोगों के लिए बहुत अच्छी सीख देती हुई बहुत शानदार रचना ।लेखनी को एक प्रणाम तो बनता है ,इस रचना के लिए ।

    1. आपके द्वारा की गई इस बेहतरीन समीक्षा के लिए आभार व धन्यवाद शब्द भी कम पड़ रहे हैं। सादर अभिवादन। आपकी समीक्षा कला अद्भुत है।

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