दोस्त

तेरे होने ना होने के बीच

मेरी आँखें पिस रही है़ं॥

रह रह के रिस रही हैं

दिन रात घिस रही हैं॥

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Responses

  1. इक तू है जो दिखता है इन आंखों को
    बाकी सब तो दिखना कब का बंद हो गया है|

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