ले दे के दो सिक्के ले कर चली थी बाजार में
इक उछालने में खो गया, एक को रख भूली कहीं पर
दो सिक्के
Comments
16 responses to “दो सिक्के”
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वाह, क्या बात है
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धन्यवाद
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बहुत ही अच्छी
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धन्यवाद
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,,vasundra जी कृपया भाव के बारे में थोड़ा सा हिंट्स दे।
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आप विनय जी का अर्थ स्पष्टीकरण देख लें
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बहुत ही बेहतरीन 🙏
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Nice
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धन्यवाद
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🙏🙏✍👌
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धन्यवाद
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परमात्मा ने हमें दो सिक्के पूँजी के रूप में दी है। पहला यौ़वन और दूसरा आत्मज्ञान। एक को तो प्रदर्शन करते हुए गवा देते हैं और दूसरे को भुलाए हुए हीं जीवन बिता देते हैं।।
क्या मैं ठीक हूँ ,वसुंधरा जी?
बहुत खूब। जीवन दर्शन।।-
🙏🙏🙏👌
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बहुत सटीक अर्थ स्पष्ट किया है आपनेl धन्यवाद
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बहुत सही, शास्त्री जी
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बेहतरीन
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