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  1. परमात्मा ने हमें दो सिक्के पूँजी के रूप में दी है। पहला यौ़वन और दूसरा आत्मज्ञान। एक को तो प्रदर्शन करते हुए गवा देते हैं और दूसरे को भुलाए हुए हीं जीवन बिता देते हैं।।
    क्या मैं ठीक हूँ ,वसुंधरा जी?
    बहुत खूब। जीवन दर्शन।।

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