दौलत

कोई ज़मीं बेचता, कोई आसमां बेचता ।
दौलत के नशे में चूर, ये ज़हां बेचता ।

कब परवान चढ़ा, मोहब्बत मुफ्लिशी का,
दौलत मोहब्बत का है, आशीयां बेचता ।

दर-दर की ठोकरें, मुफ्लिशी के हालात,
दौलत की खातिर इंसां, अरमां बेचता ।

तारीख़ गवाह, कब दौलत किसका हुआ,
दौलत को ख़ुदा मान, अपना ख़ुदा बेचता ।

लूटे हैं कई घर, ये दौलतमंद मानूस,
दौलत की बदौलत, वो खुशियाँ बेचता ।

देवेश साखरे ‘देव’

Comments

10 responses to “दौलत”

  1. ज्योति कुमार Avatar

    बिल्कुल सही जमाना के अनुसार

  2. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    Good one bro

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

  4. Satish Pandey

    बहुत खूब

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