या दहेज की मांग रखो
या मेरी चाह रखो,
दोनों में से एक चुनो
धर्मपत्नी या सामान चुनो।
सामान दहेज का कब तक
खाओगे या भोगोगे,
मैं तो जीवन भर साथ रहूँगी
मरते दम तक साथ रहूँगी।
दहेज चार दिन की शोभा
फिर केवल धोखा ही धोखा।
धर्मपत्नी या सामान चुनो
Comments
8 responses to “धर्मपत्नी या सामान चुनो”
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Wow, very good
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Thanks
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Tq very nice😊😊😊👏👍
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Thanks ji
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अतिसुंदर रचना
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सादर धन्यवाद सर
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बहुत सुंदर रचना और विचार भी👏👏
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सादर धन्यवाद
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