*धूप सुनहरी*

धूप सुनहरी बिखर गई है,
सूरज की झोली से
लाल, गुलाबी पीले-पीले,
रंग लगें मौली से
रंगोली के रंग हैं सातों,
धूप संग हैं आए
सूरज ने देखो ना कितने,
सुंदर रंग बिखराए ।।

*****✍️गीता

Comments

8 responses to “*धूप सुनहरी*”

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    1. Geeta kumari

      Thanks bro.

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  2. प्रकृति का सुंदर चित्रण

    1. धन्यवाद बहन

      1. वेलकम दी

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

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