पीते नहीं शराब हम फिर भी नशा छाया है
हर पल का हिसाब है क्या खोया क्या पाया है
लक्ष्य को हासिल करने का नशा भी जरूरी है
मानव को नशा ने महापुरुष बनाया है
नशा (2)
Comments
3 responses to “नशा (2)”
-
अतिसुंदर
-

लक्ष्य को पाने का नशा भी जरूरी है
बहुत सुंदर -

Sahi kaha
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.