नहीं है ,अब हम मजबूर

किसान है,भारत की शान है
खेत – खलियान की है,जान
मेहनत में है ,उनकी
अलग पहचान
देश को विकसित बनाने में है
उनका सबसे बड़ा योगदान
देश की अभिमान
भारत की है,अलग पहचान
किसान है ,भारत की वीर पहचान।
धन्यवाद – काजल साह – स्वरचित

Comments

3 responses to “नहीं है ,अब हम मजबूर”

  1. Geeta kumari

    किसानों पर लिखी गई बहुत सुंदर रचना

  2. Satish Pandey

    किसान है,भारत की शान है
    खेत – खलियान की है,जान
    मेहनत में है ,उनकी
    अलग पहचान
    बहुत सुन्दर, अति उत्तम कविता।

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