नादान

हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी|
हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी |
मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी|
मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ वक़्त ढूँढा करती थी |
लोग कहते थे की नादानी का असर है,
मैं उस नादानी में भी कदर ढूँढा करती थी|

Comments

4 responses to “नादान”

  1. bhoomipatelvineeta Avatar
    bhoomipatelvineeta

    Benedict of your comment ma’am.

Leave a Reply

New Report

Close