नारी की गाथा
जीवन में रंग को भरने वाली
प्यारी भोली नारी हो तु
घर ऑगन को सँवारने वाली
तुम फूलो कि क्यारी हो
माँ बहन बेटी बनकर तुम
घर को अलंकित करती हो
मुझसे तुम हो तुमसे मैं हूँ
फिर भी कोई मेल नहीं
भाव तुम्हारा सुन्दर हैं
क्योकि तुम अनमोल हो
त्याग संतोष तुम्हारा धन
यही सत्य कहानी हैं
धरा की अलौकिक प्यार समेटे
नारी छवि तुम्हारी भारी हैं
प्यार हमेशा लुटाती रहती
नारी हो सब पर भारी हो
महेश गुप्ता जौनपुरी
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