विषय – नारी के प्रति पुरुष की सोच
लेख – रीता जयहिंद ✍?
पुरातन समय में पुरुष की सोच नारी के प्रति सिर्फ घर के कामकाज और सिलाई, कढ़ाई, बुनाई वगैरह तक सीमित थी । छोटी उम्र में विवाह कर दिया जाता था ।नारी को पुरुष की द्रष्टि में मात्र संभोग की वस्तु समझा जाता था । और पढ़ाई – लिखाई नाम मात्र ही कराई जाती थी ।जिसके फलस्वरूप नारी यानी स्त्रियाँ अपने पैरों पर खड़ी होने में सक्षम नहीं हो पाती थी और उन्हें पुरुष की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता था ।औरतों को पुरुष की हर ज्यादती सहनी पड़ती थी । पुरुषों पर निर्भर होने की वजह से दहेज प्रथा भी बहुत फैलती जा रही थी ।प्रत्येक सौ औरतों में से दस औरतें दहेज की पीड़ा से ग्रस्त रहती थी या तो उन्हें मार दिया जाता था या नारियां आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाती थी । कुछ नारियों को पुरुष इतना कष्ट देते थे जिसकी कल्पना मात्र से ही मन सिहर जाता है कुछ नारियां पुरुष के शोषण का शिकार हो जाती थी और उन्हें नरक की जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ता था ।पहले के जमाने में चार – छः बच्चे होना आम बात होती थी ।नारियों की तमाम जिंदगी बच्चों को पालने मे ही गुजर जाती थी ।और नारी अपने घर में सबको खाना खिलाकर सबसे बाद में भोजन करती थी ।इस वजह से दहेज प्रथा भी खूब फैलती जा रही थी ।आज के बदलते परिवेश मे ऐसा नहीं है कुछ लोगों ने इसके विरोध में बीड़ा उठाया सामाजिक कार्य के जरिए जागरूकता पैदा की ।और कुछ सरकार ने भी नारियों के उत्थान में अपना महत्व पूर्ण योगदान दिया है ।आज की महिलाओं को भी शिक्षित करने के लिए प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, नारी निकेतन, महिला पुलिस डौरी सेल , सेना मे भर्ती, ट्रेन चालक और शायद ही कोई क्षेत्र होगा जहाँ स्त्रियों को नहीं लेते होंगे ।जिसकी वजह से देश में समाज में काफी बदलाव आया है। पुरुष का द्रष्टिकोण भी नारियों के प्रति काफी बदल गया है और दहेज प्रथा भी अब धीरे – धीरे कम होती जा रही है । अभी हमें दहेज प्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए बहुत लोगों में जागरूकता लानी है और पुरुष वर्ग अब नारी का सम्मान करने लगा है अब पुरुष का नारी के प्रति नजरिया बदल गया है ।
?????☘?☘
नारी के प्रति पुरुष की सोच
Comments
4 responses to “नारी के प्रति पुरुष की सोच”
-

ज्वलंत
-

सुन्दर
-
Naari hai narayani
-
Jai ho
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.