नारी ही तो मूल है

नारी ही तो मूल है, जीवन का आधार,
नारी के बिन शून्य है, यह सारा संसार,
यह सारा संसार, रचाया नारी ने ही,
प्यार, मुहब्बत दया, उपजती नारी से ही,
कहे लेखनी समझ, दूर कर शंका सारी,
जीवन की कल्पना, तभी है जब है नारी।
——– अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
———- डॉ0 सतीश चन्द्र पाण्डेय।

Comments

8 responses to “नारी ही तो मूल है”

  1. Geeta kumari

    नारी ही तो मूल है, जीवन का आधार,
    नारी के बिन शून्य है, यह सारा संसार,
    _______नारी के सम्मान में लिखी गई कवि सतीश जी की छंद बद्ध बहुत ही सुन्दर रचना, सुंदर भाव एवम् सुंदर शिल्प, बहुत उम्दा अभिव्यक्ति

    1. Satish Pandey

      इस सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद व अभिवादन गीता जी

  2. लेखनी को सम्बोधित करती हुई

    नारी के प्रति सम्मान समर्पित करती सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. नारी को जीवन का आधार बताती हुई,नारी के सम्मान में बहुत सुंदर कविता

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  4. वाह, नारी जीवन पर बहुत सुंदर कविता

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

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