नारी हूँ मै…

नारी हूँ मै, नादान नहीं हूँ
निस्छल हूँ , निर्लज नहीं हूँ !

पथ की उलझन सुलझाना चाहु
पग के बंधन तोडना चाहु
सिर्फ यही अपराध करु मै
अपने मान की पहचान करु मै !

अभिमान को अपना मान बताए
और मेरी पहचान सिया बतलाए
जब हर घर सिया विराज रही है
तब क्यू हर घर राम नही है !

जब मेरे प्रश्नो का तुम पर उत्तर नही है
मेरे मन के बन्धनों का हल नहीं है
तो फिर क्यू स्वयं को ज्ञानी बतलाए
स्वयं को मेरा स्वामी बतलाए !

नारी हूँ मै , नादान नहीं हूँ
निस्छल हूँ , निर्लज नहीं हूँ !

Comments

3 responses to “नारी हूँ मै…”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Bahut Khoob

  2. Himanshu Choudhary Avatar

    आहट अच्छी है आपकी सच में

  3. Abhishek kumar

    Bahut khoob

Leave a Reply

New Report

Close