निकल जाऊंगा

सोंचा नहीं था समन्दर के इतना किनारे निकल जाऊंगा,
जिनसे डरता था उन्हीं लहरों के सहारे निकल जाऊंगा,

जहाँ बनाता ही नहीं बह जाने के खौफ से रेत के मकाँ कोई,
वहीं शौक से किरदार को अपने यूँही जमाकर निकल जाऊंगा॥
राही (अंजाना)

Comments

3 responses to “निकल जाऊंगा”

  1. Abhishek kumar

    Great

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