निकल जाते है उन रास्तों पर
जिनकी कोई मंजिल नहीं
अंधेरे होते है जिन राहों में
मगर कोई अंजुमन नहीं
होते है कांटे, कंकड़
फूलों का बागान नहीं
बस इक साथी की तलाश होती है
जो हमारी तरह इन राहों पे निकला हो
निकल जाते है उन रास्तों पर
Comments
8 responses to “निकल जाते है उन रास्तों पर”
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nice 🙂
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Thanks
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nice one!!
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Thank u
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nice 1
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Thanks bro
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वाह
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बहुत खूब
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