उलझन भरी जिंदगी में
नींद के लिए समय ही कहाँ है
जब समय होता है
नींद आती ही कहाँ है।
नींद भी जरुरी है
इंसान के लिए
पर इंसान जरुरी कहाँ है
नींद के लिए।
नींद तो बेवफा है जो
उलझन के समय
साथ छोड़ देती है,
हम पलटते रह जाते हैं
वो मुंह मोड़ देती है,
नींद तो बेवफा है
Comments
5 responses to “नींद तो बेवफा है”
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वाह क्या बात है
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बहुत सारा धन्यवाद
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वेलकम
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बहुत खूब
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बहुत धन्यवाद
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