नींद

रात भर मैं नींद में सोया रहा
जब उठा अहसास सा होने लगा
बीतता बातों ही बातों में चला
यह समय तेरा व मेरा जा रहा।

Comments

11 responses to “नींद”

  1. MS Lohaghat

    बहुत ही बढ़िया

    1. बहुत धन्यवाद

  2. बहुत खूब, सरस् काव्य

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    बहुत सुंदर कव्य रचना

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद शास्त्री जी

  4. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

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