“नेत्रदान करने का लो प्राण”

किसी की आंखों को
दो जीवन ज्योति
किसी के जीवन में
भरो रोशनी
कोई तो हो जो
तुम्हारे जाने के बाद भी
तुम्हारी आँखों से
यह दुनिया देख पाए
बुझे चिरागों को दो रोशनी
मिटा दो जीवन का तम
मानव होकर मानवता दिखलाओ
नेत्रदान करने का लो प्रण।।

Comments

4 responses to ““नेत्रदान करने का लो प्राण””

  1. अतिसुंदर रचना 

    1. धन्यवाद 

  2. Amita

    मानव होकर मानवता दिखलाओ,
    नेत्रदान करने का लो प्रण,
    समाज को एक अच्छे कार्य के लिए प्रेरित करती हुई आपकी रचना, बहुत सुंदर 👌👌

  3. Ekta

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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