न करना मन दुःखी

न करना मन दुःखी
किसी की बातों से
ये तो दुनिया है
रुला देगी, तुम्हें बातों से।
भरोसा हो उसी पर
जो समझता हो तुम्हें
न जुडना भूल कर भी
खुदगरज के नातों से

Comments

6 responses to “न करना मन दुःखी”

  1. बहुत सुन्दर, लाजवाब सर

  2. वाह क्या बात है पाण्डेय जी अद्भुत

  3. This comment is currently unavailable

  4. Geeta kumari

    कवि सतीश जी ने अपनी इस कविता में एक बहुमूल्य संदेश दिया है
    कि कुछ लोग ज़िन्दगी में यदि परेशान करें तो हमे परेशान नहीं होना है और अपनी जगह बनाते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है ।
    बहुत ही सुन्दर सन्देश और बहुत सुंदर प्रस्तुतिकरण

  5. बहुत सुंदर कविता सर

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