( पगली लड़की / 05 )
समझ ना पाया मैं उसके
जज्बातो कि हवाओ को
तकरार भी मैंने खूब किया
उस पगली को रुलाने के लिए
दर्द भर कर सिने में
अपने जहाँ को लुटाता रहा
खामोशी की झोली लेकर
इधर उधर घुमता रहा
छोटी छोटी बातो पर
मैं गुस्सा होता रहा
उसकी हर नादानी पर
मैं डाट फटकार लगाता रहा
सच में वह पगली ही
ना जाने क्यो इतना बेचैन रहती हैं
मेरे मुस्कुराहट के लिए
बात – बात पर ऑसू बहाती हैं
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
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