पढ़ी लिखी प्रिये….

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम
मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में

मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये
तुम खाती पिज्जा बर्गर हो

मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या
छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या

तुम रहिश जादी पैसे की बेटी
मैं वेवस लाचार किसान का बेटा

तुम हर बात को पैसे से तौलती
मैं जज्बात का संस्कार प्रिये

शौक तुम्हारे लम्बे चौड़े
मेरा कुछ शौक नहीं हैं

तुम कोका कोला पिज्जा खाती
मैं छाछ चना पर करता गुजारा

तुम शहरो की हो नूर परी
मैं गॉव का ठहरा आवारा

तुम जज्बातो को मेरे क्या समझोगी
मैं गॉव का ठहरा गॉवारी प्रिये

महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

One response to “पढ़ी लिखी प्रिये….”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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