पत्थर को दे जान

उठ जा कविता लिख इंसान
कुछ तो सृजन कर धरती पर,
पत्थर को दे जान,
जितना अर्जित करता है तू
उसमें से दे दान।
और की सत्ता से मत डर तू
रब की सत्ता मान।
विष के कड़वे बोल सुना मत
बांट ले मीठा पान।

Comments

2 responses to “पत्थर को दे जान”

  1. अति सुन्दर काव्य  सृजन

    1. सादर धन्यवाद

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