पहचान

जब दिल से दिल के तार जुड़े हों,
किसी पहचान की जरूरत कहाँ।
नाम भले ही गुम जाए,
चाहे चेहरा भी बदल जाए..
आपकी आवाज़ से,आपके अंदाज़ से,
आपकी रूह को पहचान लेंगे हम।
ये चाहत है कोई दिल्लगी नहीं,
सीने में छुपाकर घूमें ग़म,
पवन सुहानी कहे कहानी
यादों में अक्सर ऑंखें होती नम॥
_______✍गीता

Comments

5 responses to “पहचान”

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति दीदी मां* 🙏

    1. Geeta kumari

      Thanks sis.

  2. Satish Chandra Pandey

    वाह अति सुंदर

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धन हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  3. Amita

    बहुत सुंदर पंक्तियां दीदी मां 🙏

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