पिता का साया,
छांव है शीतल सी।
जो धूप से बचाती है,
बचपन को बचाती है।
वह कठोर हाथों का स्पर्श,
बेशक तुम्हें अच्छा ना लगे।
पर उसके पीछे की मेहनत,
तुम बखूबी जानती हो।
हां, अभी तुम युवा हो,
तो ऐसा ही लगता है।
पिता की रोक-टोक,
अच्छी नहीं लगती।
सिर्फ नजरे चुराने,
को जी चाहता है।
वह क्या चाहते हैं,
तुम्हें पता नहीं!
वह बस चाहते नहीं की।
किसी परेशानी से ,
तुम्हारा सामना हो।
वह छुप कर मुस्कान देखते हैं।
तुम्हारी।
वह पिता है तुम्हारे,
वह तुमसे बहुत प्यार करते हैं।
पिता का साया।
Comments
14 responses to “पिता का साया।”
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बड़े नसीब वाले होते है वह जिनके सर पर पिता का हाथ होता हैं।।
उनकी सारी ज़िद पूरी हो जाती हैं,क्योकि उनके साथ पिता होता है-

सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद
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पिता पर लिखी गई बहुत सुंदर पंक्तियां। पिता ऐसे ही होते हैं।
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बहुत बहुत आभार 🙏
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nice
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Thank you
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अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना
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बहुत बहुत आभार सर
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जितनी तारीफ की जाए उतनी कम, बहुत सुंदर
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हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद
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बेहतरीन लेखन
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हार्दिक धन्यवाद
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Nice!👍
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Thank you
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