पुरानी किताबो के पन्ने पलटकर देखो
इश्क़ की गहराइयो मैं खुद उतरकर देखो
इश्क़ से गहरा समंदर भी नही
बस एक बार आज़माकर देखो
चंद लम्हो मैं तय होगा चाँद का फासला
एक बार फासला मिटाकर देखो
मेरा चमन कुछ बीरान सा पड़ा है
बीरानियो में खुशबुए बहार बनके देखो
घुप अंधेरे रास्तों से गुज़र रहा हूँ
उम्मीद का जुगनू सा चमककर देखो
उम्मीदों का दिया जलाना है अभी
तुम बाती बनकर तों देखो
मुरझाने सा लगा है मेरे बाग का बूटा
सावन की पहली फुहार बनके तो देखो
इन सर्द चल रही हवाओं मैं,
मेरे तन का लिबास बनके देखो
सफर की हर मुश्किलों का,
एक आसान जवाब बनके देखो
कदम कुछ डगमगाने लगे हैं,
मेरे कांधे का सहारा बनके देखो
एक ताज मेरी भी ख्वाइश है
बस मेरे दिल की मुमताज़ बनके देखो
एक छोटा सा आसियाना परिंदो सा होगा
मेरे तिनको को हाथों से सजाके देखो
मेरा बाग भी गुलों से गुलज़ार होगा,
थोड़ा इश्क़ की मल्हार बनके देखो!
सफर अभी अधूरा ही है
सफर की अज़ीज हमसफर बनके देखो
कुछ संजो रखे हैं ख्वाब मैंने
एक हसीन ग़ज़ल बनके देखो
पुरानी किताबो के पन्ने पलटकर देखो
Comments
3 responses to “पुरानी किताबो के पन्ने पलटकर देखो”
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वाह
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वाह
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Nice 🙂
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