पुरानी हवेली

कई वर्षों से इस पुरानी हवेली में कोई आया ही नहीं।
जो भी आया मैं गैर समझ कर उसे अपनाया ही नहीं।।

Comments

7 responses to “पुरानी हवेली”

  1. दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है
    लुटे दिल में दिया जलता नहीं…

    1. बेहतरीन समीक्षा..

  2. हृदय स्पर्शी रचना… टूटे दिल की व्यथा का ख़ूबसूरती से चित्रण किया है।

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