पूर्णता की खोज
पूर्णता की खोज
संपूर्ण होने के लिए ,
पूर्ण होने के लिए।
नये मार्ग ढूंढता रहा
आगे ही मै बढ़ता रहा।
पर बाद में समझा ये शब्द।
मोक्ष प्राप्ति ही पूर्णता है,
जग में फैली बस तृष्णा है।
भटकाती है जो राहों से,
खींच लेती मोहक इशारों से,
कभी ममता के बंधन में बांधती हैं,
कभी समाज का डर दिखा साधती है।
छटपटाती ही रह जाती ,
आत्मा अनमनी।
पंछी कि जैसे पिंजरे में फंसी।
जिस दिन मुक्ति का बोध हुआ, पंछी बन फिर उड़ जाती है,
वो हाथ नहीं फिर आती है।
बंधनों से समाधि,
समाधि से मुक्ति की ओर मुड़ जाती है।
तब कहीं जाकर शायद पूर्णता को पाती है।
निमिषा सिंघल
वाह
,🙏🙏
वाह
Thanks
धन्यवाद
धन्यवाद
Nice
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Thanks dear
Nice
😀😀