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  1. कोहरा घूम रहा है पथ पर,
    बाहर जाते लगता है डर।
    धूप सखी भी आज ना आई,
    दिनकर छिपे रहे हैं दिन भर।
    —– कवि गीता जी की वर्तमान कुहरे से भरे मौसम पर बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ। शिल्प और भाव का सुन्दर समन्वय

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