पैगाम

मेरे खतों के पैगाम का  आलम  कुछ  यूँ  हैं ‘ज़नाब’,

कि सफीरों की लाशें बिछ गयीं हैं राह ए इंतिजार में,

Comments

One response to “पैगाम”

Leave a Reply

New Report

Close