तेरे साथ जो बीता बचपन कितना सुन्दर जीवन था, ख़ूब लड़ते थे फिर हँसते थे कितना सुन्दर बचपन था, माँ जब तुझको दुलारती मेरा मन भी चिढ़ता था तू है उनके बुढ़ापे की लाठी ये […]

कितने ही दिन गुज़रे हैं पर, ना गुजरी वो शाम अभी तक; तुम तो चले गए पर मैं हूँ, खुद में ही गुमनाम अभी तक! . तुम्ही आदि हो,…तुम्ही अन्त हो,…तुमसे ही मैं हूँ, जो […]

जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है जिंदगी कभी कभी पानी में भी […]

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है। दुनिया अपने हौसले से ,जमीं हुई है। खुशफहमी ना पाल कि नसीब से सब मिलेगा। कर्म करने से ही ये आसमाँ झूकेगा। लाख लगाओ फेरे ,मन्दिर, […]

बैंगलोर मे हुए कावेरी विवाद को देखते हुए अपने कुछ एहसासों को आपके सामने रखने की एक कोशिश की है और शायद आप भी इससे जुड़ पाए | चारो और जलती- दहलती प्रस्थिथियो से भयातुर […]

प्यार पनपता है…. इक नन्हे पौधे की तरह खोलकर महीन मिट्टी की परतों को पाकर चंद बूंदे पानी की खोलकर अपनी हरी बाहें समा लेना चाहता है दुनिया को इनमें मगर कभी कभी रूंध जाता […]

ღღ_मैं कौन हूँ आखिर, और कहाँ मेरा ठिकाना है; कहाँ से आ रहा हूँ, और कहाँ मुझको जाना है! . किसी मकड़ी के जाले-सा, उलझा है हर ख़याल; जैसे ख़ुद के ही राज़ को, ख़ुद […]

ღღ_आज ना ही आओ मिलने, ये मुलाकात रहने दो; कुछ देर को मुझको, आज मेरे ही साथ रहने दो! . अन्धेरों की, उजालों की, हवाओं की, चिरागों की; या अपनी ही कोई बात छेड़ो, मेरी […]

ღღ_ख़ुद से लेते हुए इन्तक़ाम, देखा नहीं तुमने; अच्छा हुआ मेरा अस्क़ाम, देखा नहीं तुमने! . उतर ही जाता चेहरा मेरा, शर्म से उसी दम; अच्छा हुआ मेरा अन्जाम, देखा नहीं तुमने! . कल रात […]

ღღ_महबूब से मिलने की, हर तारीख़ ग़ज़ल होती है; महफ़िल में उनके हुस्न की, तारीफ़ ग़ज़ल होती है! . ग़ज़ल होती है महबूब की, बोली हुई हर बात; आशिक के हर ख्वाब की, तकदीर ग़ज़ल […]

ღღ_मैं भी लिक्खूँगा किसी रोज़, दास्तान अपनी; मैं भी किसी रोज़, तुझपे इक ग़ज़ल लिक्खूँगा! . लिक्खूँगा कोई शख्स, तो परियों-सा लिक्खूँगा; ग़र गुलों का ज़िक्र आया तो, कमल लिक्खूँगा! . बात ग़र इश्क़ की […]

ღღ__महज़ एक लम्हा ही तो हूँ, गुज़र जाने दे; इस तरह तू जिंदगी अपनी, संवर जाने दे! . ले चलें जिस डगर, दुश्वारियाँ मोहब्बत की; मेरे महबूब अब मुझको, बस उधर जाने दे! . तुझे […]

ღღ_कर तो लूँ मैं इन्तजार, मगर कब तक; लौट आएगा बार-बार, मगर कब तक! . उसे चाहने वालों की, कमी नहीं है दुनिया में; याद आएगा मेरा प्यार, मगर कब तक! . प्यार वो जिस्म […]

माझ्याशी आजकाल हे घडते विचित्र आहे माझ्याशी आजकाल हे घडते विचित्र आहे , डोळ्यापुढे माझ्या गा तुझेच चित्र आहे तुझे रूपवर्णन करण्यापलीकडे शब्दही अपुरे , हातात माझ्या अझुनी ते अपूर्ण पत्र आहे एका कटाक्षाने घालीले […]

ღღ_कभी यूँ भी तो हो, कि दिल की अमीरी बनी रहे; फिर चाहे तो ज़िन्दगानी, ग़ुरबत में बसर कर दे! . कोई एक शाम फुरसत की, कभी मेरे लिए निकाल; फिर उस मुलाकात में ही, […]

ღღ_कल फ़िर से दोस्तों ने, तेरा ज़िक्र किया महफ़िल में; कल फ़िर से अकेले में, तुझे सोंचता रहा मैं देर तलक! . कल फ़िर से तेरी यादों ने, ख़्वाबों की जगह ले ली; कल फ़िर […]

ღღ_तजुर्बे सब हुए मुझको, महज़ उससे वफ़ा करके; दुआ जीने की दी उसने, मुझे खुद से जुदा करके! . मैं कहना चाहता तो हूँ, यकीं उसको अगर हो तो; ग़ैर का हो नहीं सकता, उससे […]

ღღ_वो चाँद जो दिखता है, वो सबको ही दिखता है; महज़ देख लेने भर से ही, वो हमारा नहीं होता! . दिन तो कट ही जाता है, कश्मकश में जिंदगी की; तेरे बिन एक पल […]

ღღ_हम ढूँढ आए ये शहर-ए-तमाम, कहाँ रहते हो; अरे अब आ जाओ कि हुई शाम, कहाँ रहते हो! . इज्जत ख़ुद नहीं कमाई, विरासत ही सम्हाल लो; कहीं हो जाए ना ये भी नीलाम, कहाँ […]

ღღ_मोहब्बत करके नहीं देखी, तो ये जहाँ नहीं देखा; मेरे महबूब तूने शायद, पूरा आसमां नहीं देखा! . तुझमें खोया जो एक बार, फ़िर मिला नहीं कभी; खुद की ही तलाश में मैंने, कहाँ-कहाँ नहीं […]

ღღ__तेरे लब पे सिवा मेरे, कोई नाम आये तो बुरा लगता है; इक वही मौसम, जब हर शाम, आये तो बुरा लगता है! . जागते रहने की तो हमको, आदत हो गयी मोहब्बत में; नींद […]

ღღ__ठहरा हुआ हूँ कब से, मैं तेरे इन्तज़ार में; आख़िर सफ़र की मेरे, कोई इब्तिदा तो हो! . मंजिल पे मेरी नज़र है, अरसे से टिकी हुई; पहुँचूं मैं कैसे उस तक, कोई रास्ता तो […]

क्या यही सरजमीं थी मेरे वास्ते ये कैसी कमी थी मेरे वास्ते खुद को देखू तो स्वर्ग का अहसास हैं मेरे दामन में आतंक का आभास हैं सहमे सहमे है बच्चे मेरे हर घरी जाने […]

रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I  कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता […]

डरते डरते ही सही मैनें आखिर वो बात कह ही दी जो लफ़्जों में कभी ढल ना सके वो अहसास आज बयां हो ही गये मगर दिल अभी भी गमगीन सा बैठा हुआ है जो […]

इक अजीब सा डर रहता है आजकल पता नहीं क्यों, किस वजह से, किसी के पास न होने का डर या किसी के करीब आ जाने का|

गरीबी ख़ुद के सिवा, औरों पे असरदार नहीं होती; शायद इसीलिए भूखों की, कोई सरकार नहीं होती !! . महज़ दो वक़्त की रोटी, और चन्द पैरहन तन पे; फक़ीरों को इससे ज्यादा की, दरकार […]

जो आज है वो कल न होगा! गमों का पल हरपल न होगा! मिलेगी रोशनी कदमों को, दर्द का कोई सकल न होगा!     तुम्हारे लब पर नाम मेरा जब आएगा! गुजरा हुआ मंजर […]

ღღ_हर लम्हा, हर लफ्ज़, बस एक ही आरजू; अरे, दुनिया में बस वही, एक इंसान थोड़े है! . याद करते रहते हो, रात-रात भर उसको; अरे, सुबह को उसके बारे में, इम्तिहान थोड़े है! . […]